बर्ज़िन आर्काइव्स

डॉ. अलेक्ज़ेंडर बर्ज़िन के बौद्ध लेखों का संग्रह

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अलेक्ज़ेंडर बर्ज़िन का संक्षिप्त जीवन परिचय

एलेक्जे़ंडर बर्ज़िन का फोटो सन् 1944 में पेटरसन, न्यू जर्सी में जन्मे एलेक्ज़ेंडर बर्ज़िन ने 1965 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय के साथ संयोजित रुटगर्स विश्वविद्यालय के प्राच्य अध्ययन विभाग से बी.ए. की डिग्री हासिल की; और हार्वर्ड विश्वविद्याल के सुदूर पूर्वी भाषाओं (चीनी) तथा संस्कृत और भारतीय अध्ययन, विभागों से 1967 में एम.ए. तथा 1972 में पीएच.डी. की डिग्री हासिल की। वे 1969 से 1998 तक मुख्यतः धर्मशाला, भारत में रहे जहाँ उन्होंने शुरुआती वर्षों में फुलब्राइट स्कॉलर के रूप में बौद्ध धर्म की सभी चार परम्पराओं के आचार्यों से शिक्षा हासिल की और अभ्यास किया। यहाँ परम पावन दलाई लामा के प्रधान शास्त्रार्थ सहयोगी और सहायक अनुशिक्षक दिवंगत त्सेनझाब सेरकाँग रिंपोशे उनके मुख्य शिक्षक थे। अनेक विश्व यात्राओं के दौरान उनके साथ रहते हुए बर्ज़िन ने नौ वर्षों तक उनके भाषांतरकार और सचिव के रूप में सेवा की। यदा-कदा उन्होंने परम पावन दलाई लामा के भाषांतरकार के रूप में भी सेवा की है।

तिब्बती कृतियों और अभिलेखों के पुस्तकालय के अनुवाद ब्यूरो के संस्थापक सदस्य के रूप में बर्ज़िन ने तिब्बती भाषा की उन तकनीकी अभिव्यक्तियों को अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद करने के लिए एक नई शब्दावली विकसित की है जिनका अर्थ अक्सर गलत समझा गया है। अनेक अन्य भाषाओं के अनुवादकों के साथ मिलकर काम करते हुए उन्होंने इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर अन्य भाषाओं के अनुवादकों को अपनी-अपनी शब्दावलियों को सुधारने और संवर्धित करने में सहायता की है।

1983 से बर्ज़िन ने विश्व भर में यात्राएं करते हुए सत्तर से अधिक देशों में विभिन्न धर्म केन्द्रों और विश्वविद्यालयों में बौद्ध पद्धतियों और दर्शन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ तिब्बती-मंगोलियाई इतिहास और ज्योतिष-चिकित्सा शास्त्र के सिद्धांतों के अध्यापन का कार्य किया है। उनकी यात्राएं मुख्यतः विश्व के भूतपूर्व और वर्तमान साम्यवादी देशों, लातिन अमेरिका, अफ्रीका, मध्य एशिया और मध्य पूर्व के देशों पर केंद्रित रही हैं। उनकी अनगिनत प्रकाशित कृतियों और अनुवादों के अलावा उनके कई व्याख्यानों को भी स्थानीय भाषाओं में प्रकाशित किया गया है।

र्ज़िन ने रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ चलाए जा रहे चेरनोबिल पीड़ितों के लिए तिब्बती चिकित्सा सहायता के कार्यक्रम और मंगोलिया में पारम्परिक संस्कृति को पुनः प्रचलित करने के उद्देश्य से बौद्ध धर्म के बारे में स्थानीय भाषाओं में पुस्तकें तैयार करने के लिए गेरे फाउंडेशन की एक परियोजना जैसे अनेक कार्यक्रमों में गैर-सरकारी सम्पर्क सूत्र के रूप में भी कार्य किया है। उन्होंने बौद्ध-इस्लाम धर्म संवाद स्थापित करने और उसे बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अपने लेखन कार्य के लिए और अधिक अनुकूल परिस्थितियों की तलाश में 1998 में बर्ज़िन पश्चिम में लौट आए। अब वे यदा-कदा यात्राएं करते हैं और कई धर्म केन्द्रों में अध्यापन कार्य करते हैं, किन्तु उनका अधिकांश समय बर्ज़िन आर्काइव्स की वैबसाइट के लिए अपनी अप्रकाशित सामग्री को प्रकाशन के लिए तैयार करने में व्यतीत होता है। सम्प्रति वे बर्लिन, जर्मनी में रहते हैं।